कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा के विशेष प्रयासों और स्वास्थ्य तथा महिला बाल विकास विभाग के समन्वय से दो वर्षीय आदिवासी बालक कान्हा के चेहरे पर न केवल मुस्कान लौट आई है, बल्कि उसके परिजनों के चेहरो पर भी सुकून दिखाई पड रहा है। यह वहीं बालक कान्हा आदिवासी है, जिसे कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा द्वारा एम्स प्रबंधन से चर्चा कर उसे बेहतर इलाज के लिए सितंबर माह में भोपाल शिफ्ट किया गया था। प्रशासन सहित स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग और एम्स प्रबंधन भोपाल के साझा प्रयासों से कान्हा को स्वस्थ जीवन मिला है। गत 16 अक्टूबर 2026 को श्योपुर एनआरसी में आंगनबाडी कार्यकर्ता के साथ फॉलोअप के लिए आये कान्हा का वजन अब 6 किलो 600 ग्राम हो गया है और वह पूरी तरह से स्वस्थ है। बता दे कि कान्हा आदिवासी पिता श्री मंगल आदिवासी को महिला बाल विकास विभाग द्वारा स्वास्थ्य लाभ के लिए एनआरसी श्योपुर लाया गया था, चिकित्सको की टीम द्वारा बालक का एनआरसी प्रोटोकॉल अनुसार उपचार किया जा रहा था, लेकिन बालक का वजन नही बढने से श्योपुर की चिकित्सकीय टीम द्वारा जांच एवं परीक्षण में बालक को किसी प्रकार की जन्मजात मेटाबोलिक विकृति होने की संभावना व्यक्त की गई थी तथा उच्च मेडिकल संस्थान में परीक्षण के लिए परामर्श दिया गया था।
इस मामले में कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा द्वारा मानवीय दृष्टिकोण के साथ एम्स भोपाल के प्रबंधन से इस संबंध में चर्चा करने के बाद बालक की सकुशल शिफ्टिंग के निर्देश स्वास्थ्य विभाग एवं महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों को दिये गये थे। उक्त निर्देशो के क्रम में लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस के माध्यम से स्वास्थ्य दल की निगरानी में बालक को 11 सितंबर को एम्स भोपाल में बेहतर उपचार के लिए शिफ्ट किया गया था।
आंगनबाडी कार्यकर्ता श्रीमती रूकमणी भी बच्चें और उसके परिजनों के साथ एम्स भोपाल में ही रहीं और निरंतर निगरानी के साथ ही श्योपुर में अधिकारियों के साथ उचित समन्वय के लिए कार्य करती रहीं, उनकी भूमिका भी प्रशंसनीय है। एम्स भोपाल में निरंतर उपचार के उपरांत बालक के पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उसे वापस अपने गांव कलमी लाया गया और आंगनबाडी कार्यकर्ता एवं सुपरवाईजर की निरंतर गृह भेंट के माध्यम से उसके पोषण तथा स्वास्थ्य पर नजर रखते हुए चिकित्सीय परामर्श अनुसार दवाईयां प्रदान की गई। वर्तमान में बालक पूरी तरह से स्वस्थ हो गया है। गत 16 अक्टूबर को उसे एनआरसी श्योपुर में फॉलोअप के लिए लाया गया, जहां उसके वजन और लम्बाई के साथ ही पोषण स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न पैमानों पर जांच की गई, अब बालक का वजन बढकर 6 किलो 600 ग्राम हो गया है, जबकि गत 25 अगस्त को एनआरसी लाये जाने पर बालक का वजन 4.800 ग्राम था। इस प्रकार सभी के साझा प्रयासों और मानवीय दृष्टिकोण के साथ किये गये कार्य को सफलता मिली है और बालक कान्हा न केवल पूरी तरह से स्वस्थ है, बल्कि आम बच्चों की तरह वह भी घर-आंगन में खेल रहा है।


