ग्रामीण युवाओं को गांव में ही स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने में केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ऐसी ही प्रेरक कहानी केवलारी तहसील के ग्राम धानागाड़ा निवासी युवा नितिन ठाकुर की है, जिन्होंने राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) का लाभ लेकर बकरी पालन को व्यवस्थित व्यवसाय के रूप में अपनाया और आधुनिक सुविधाओं से युक्त बकरी पालन इकाई स्थापित की।

20 लाख रुपये की परियोजना पर मिला 10 लाख रुपये का अनुदान

नितिन ठाकुर ने भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अंतर्गत 100+5 गोट ब्रीडिंग सेटअप की स्थापना की। इस परियोजना में 100 बकरियों एवं 5 बकरों के पालन की व्यवस्था की गई है। कुल 20 लाख रुपये की परियोजना लागत में शासन द्वारा 50 प्रतिशत अर्थात 10 लाख रुपये का पूंजीगत अनुदान प्रदान किया गया।

अनुदान मिलने से नितिन के लिए बड़े स्तर पर बकरी पालन व्यवसाय शुरू करना आसान हुआ। उन्होंने उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए अपने गांव में ही आधुनिक सुविधाओं से युक्त फार्म विकसित किया।

गांव में ही तैयार किया आधुनिक बकरी पालन फार्म

नितिन ठाकुर ने ग्राम धानागाड़ा में आधुनिक बकरी पालन फार्म तैयार किया और 14 अगस्त 2024 को इकाई की शुरुआत की। फार्म में बकरियों के वैज्ञानिक तरीके से पालन-पोषण, प्रबंधन एवं सुरक्षा की समुचित व्यवस्था की गई है। आधुनिक पद्धतियों को अपनाते हुए नितिन बकरी पालन को एक व्यवस्थित व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं।

उनका यह प्रयास गांव के अन्य युवाओं और पशुपालकों के लिए भी प्रेरणादायी बन रहा है। नितिन का कहना है कि उचित मार्गदर्शन, सरकारी योजनाओं का लाभ और मेहनत के साथ पशुपालन को ग्रामीण क्षेत्र में बेहतर स्वरोजगार का माध्यम बनाया जा सकता है।

योजना से मिला अपने गांव में ही आगे बढ़ने का अवसर

अपनी सफलता के अनुभव साझा करते हुए नितिन ठाकुर ने बताया कि राष्ट्रीय पशुधन मिशन से उन्हें अपने गांव में ही व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिला। योजना के माध्यम से प्राप्त अनुदान ने आधुनिक बकरी पालन इकाई स्थापित करने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया।

नितिन ठाकुर ने ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और पशुपालन क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त किया।

नितिन की कहानी यह दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं की जानकारी लेकर उनका प्रभावी उपयोग किया जाए, तो गांव में उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से भी युवा अपना व्यवसाय खड़ा कर स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।