कोरोना के दौरान आईटी कंपनी में प्रोजेक्ट कम होने लगे और कर्मचारियों की छंटनी शुरू हुई तो जबलपुर के साकेत कुमार यादव की नौकरी भी चली गई। नौकरी जाने के बाद उन्होंने दोबारा जॉब करने की बजाय अपने पुराने शौक को ही रोजगार बनाने का फैसला किया। फूड बिजनेस शुरू करने का मन बनाया और बेकरी के काम में प्रशिक्षण लेने के लिए ग्वालियर गए।
करीब एक साल तक बेकरी व्यवसाय को समझने और सीखने के बाद वापस जबलपुर लौटे और दीक्षितपुरा में अपना काम शुरू किया। इसके लिए उन्होंने होर्टिकल्चर विभाग की पीएमएफएमई योजना के तहत 8 लाख रुपए का ऋण मिला हैं। योजना के तहत यह ऋण पंजाब नेशनल बैंक से उपलब्ध हुआ।
साकेत बताते हैं कि उन्हें पहले से ही फूड बिजनेस में रुचि थी। नौकरी जाने के बाद उन्होंने परिवार के बड़े लोगों और इस क्षेत्र में काम कर रहे परिचितों से सलाह ली। इसके बाद बेकरी बिजनेस को चुना। ग्वालियर जाकर करीब एक साल तक इस काम की बारीकियां सीखीं। इसके बाद दीक्षितपुरा स्थित डुप्लेक्स से बेकरी प्रोडक्ट तैयार करने का काम शुरू किया।
बिस्किट, केक-पेस्ट्री से लेकर क्लाउड किचन तक
साकेत की बेकरी में बिस्किट, केक, पेस्ट्री सहित बेकरी से जुड़े कई तरह के उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इसके साथ ही वे क्लाउड किचन भी संचालित कर रहे हैं। उनका क्लाउड किचन ‘ओवेंटो’ नाम से जोमैटो पर लिस्टेड है। फिलहाल उनके उत्पादों की बिक्री मुख्य रूप से जबलपुर शहर में ही हो रही है।
करीब 50 हजार रुपए महीने का रेवेन्यू
साकेत के मुताबिक अभी कारोबार शुरुआती दौर में है। वर्तमान में करीब 50 हजार रुपए प्रतिमाह का रेवेन्यू हो जाता है। सालाना कमाई करीब 5 से 6 लाख रुपए तक पहुंच रही है। उनका कहना है कि अभी कारोबार को शुरू हुए करीब डेढ़ साल ही हुआ है, इसलिए फिलहाल स्थानीय बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने और प्रोडक्शन बढ़ाने पर ध्यान है।
साकेत अब अपने बेकरी कारोबार को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। उनका लक्ष्य जबलपुर में आउटलेट शुरू करना है। इसके बाद धीरे-धीरे उत्पादन बढ़ाकर दूसरे शहरों में भी अपने उत्पाद भेजने की योजना है।
साकेत कहते हैं कि नौकरी जाने के बाद उनके सामने आगे का रास्ता चुनने की चुनौती थी। लेकिन उन्होंने जोखिम लेकर अपने शौक को ही व्यवसाय में बदलने का फैसला किया। आज बेकरी का काम उनके लिए सिर्फ कमाई का जरिया नहीं, बल्कि उनका पैशन और प्रोफेशन दोनों बन चुका है।



