प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस जयवंती हॉक्सर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बैतूल में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा पर केंद्रित प्रतिमाह आयोजित की जाने वाली गतिविधियों की श्रृंखला के अंतर्गत भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ एवं हिन्दी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हिन्दी दिवस एवं हिन्दी पखवाड़े के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों, प्रतियोगिताओं एवं रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. मीनाक्षी चौबे के संरक्षण, हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. अनीता सोनी के मार्गदर्शन एवं भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के संयोजक प्रो. राकेश कुमार पवार के संयोजन में किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। छात्रा भावना सूर्यवंशी द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना ने कार्यक्रम को गरिमामय एवं आध्यात्मिक वातावरण प्रदान किया। स्वागत एवं भूमिका वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के संयोजक प्रो. राकेश कुमार पवार ने कहा कि हिन्दी केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सामाजिक जीवन, चिंतन, दर्शन और व्यवहार को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने सामान्य व्यवहार, अध्ययन एवं दैनिक जीवन में हिन्दी भाषा का अधिकाधिक एवं प्रभावी उपयोग करें तथा हिन्दी के समृद्ध साहित्य से जुड़कर अपनी अभिव्यक्ति क्षमता का विकास करें।
कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता के रूप में राजनीति शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. धर्मेन्द्र कुमार ने हिन्दी भाषा एवं साहित्य के विभिन्न महत्वपूर्ण आयामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विश्व की प्रमुख भाषाओं में हिन्दी का महत्वपूर्ण स्थान है। हिन्दी ने भारतीय समाज को जोड़ने तथा विविध सांस्कृतिक परंपराओं को अभिव्यक्ति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने विद्यार्थियों को हिन्दी के अध्ययन के साथ-साथ इसके व्यावहारिक एवं रचनात्मक प्रयोग के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हिन्दी विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. अनीता सोनी ने कहा कि वर्तमान समय में हिन्दी का प्रभाव समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर बढ़ रहा है। शिक्षा, साहित्य, संचार, विज्ञान, तकनीक और जनसंचार के क्षेत्र में हिन्दी के प्रयोग के अवसर लगातार विस्तृत हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में हिन्दी के प्रति रुचि विकसित करने के साथ-साथ उनकी सृजनात्मक एवं अभिव्यक्तिगत क्षमताओं को प्रोत्साहित करना भी आवश्यक है।
विशिष्ट वक्ता के रूप में हिन्दी के सहायक प्राध्यापक डॉ. डी. एस. सिसोदिया ने हिन्दी भाषा की विकास यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए हिन्दी के ऐतिहासिक, साहित्यिक एवं भाषायी विकास की चर्चा की। उन्होंने हिन्दी के विकास में विभिन्न साहित्यकारों एवं साहित्यिक धाराओं के योगदान को रेखांकित किया। वहीं डॉ. दिव्यप्रकाश ने हिन्दी भाषा के साहित्यिक सौंदर्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिन्दी की विभिन्न उपभाषाओं एवं बोलियों में समाहित विविधता इसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का परिचायक है। उन्होंने विद्यार्थियों को हिन्दी साहित्य के विविध रूपों एवं विधाओं से परिचित होने के लिए प्रेरित किया।
15 दिवसीय हिन्दी पखवाड़े में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन
हिन्दी दिवस एवं 15 दिवसीय हिन्दी पखवाड़े के दौरान विद्यार्थियों की रचनात्मकता, भाषायी दक्षता, तर्क क्षमता एवं अभिव्यक्ति कौशल को विकसित करने के उद्देश्य से विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं गतिविधियों का आयोजन किया गया। इनमें निबंध लेखन प्रतियोगिता, आशुभाषण प्रतियोगिता, काव्य पाठ प्रतियोगिता, प्रश्नोत्तरी, भाषण प्रतियोगिता एवं कहानी लेखन प्रतियोगिता प्रमुख रहीं। विद्यार्थियों ने इन गतिविधियों में उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए हिन्दी भाषा के प्रति अपनी रुचि एवं रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित एवं उत्साहित किया गया।
कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. लोकेश नरवरे द्वारा किया गया तथा औपचारिक आभार प्रदर्शन प्रो. योगेश्वरी पवार ने किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के लगभग 150 विद्यार्थियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के सफल आयोजन में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ एवं हिन्दी विभाग के समस्त प्राध्यापकों का सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ।


